ज़िंदगी का हर लम्हा तेरे ख़याल में गुज़रने लगा है, बिना बात के भी हर पल मुस्कुराने लगा है, हटती ही नहीं तेरे चेहरे से मेरी नज़र, सब कुछ भुला के दिल तेरा होने लगा है, ये इश्क़ है मोहब्बत है इबादत है क्या, मुझे तो तुझसे पहले का कोई वास्ता लगने लगा है, ये वक़्त हर पल बदलने लगा है, मेरी ज़िंदगी का अक्स भी तुझसे जुड़ने लगा है, समझ से परे है ज़माने के लिए इश्क़, चंद मुलाक़ातों में ही जन्मो का बंधन बँधने लगा है...
-शिव्या
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